tag:blogger.com,1999:blog-7124647974393569217.post2540939623440611068..comments2008-04-17T12:16:46.535-05:00Comments on प्रमोद रंजन: उदय प्रकाश, मोहल्ला और मंगलेशजी की टिप्प्णी .Pramod Ranjanhttp://www.blogger.com/profile/16171943793022610620noreply@blogger.comBlogger3125tag:blogger.com,1999:blog-7124647974393569217.post-12827236899259676582008-04-17T12:16:00.000-05:002008-04-17T12:16:00.000-05:00Hello. This post is likeable, and your blog is ver...Hello. This post is likeable, and your blog is very interesting, congratulations :-). I will add in my blogroll =). If possible gives a last there on my blog, it is about the <A HREF="http://sbtvd.blogspot.com" REL="nofollow">SBTVD</A>, I hope you enjoy. The address is http://sbtvd.blogspot.com. A hug.<A HREF="1867320551" REL="nofollow"></A>SBTVDhttp://sbtvd.blogspot.comnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7124647974393569217.post-49829577426382606892008-02-04T21:59:00.000-06:002008-02-04T21:59:00.000-06:00सही कह रहे हो प्रमोद जी। साहित्य, संस्कृति, समाज, ...सही कह रहे हो प्रमोद जी। साहित्य, संस्कृति, समाज, राजनीति हर क्षेत्र में अगाम्भीर्य और मीडिओक्रिटी का बोलबाला है। ब्लाग इसके अपवाद कैसे हो सकते हैं। वैसे भी ये सिर्फ साहित्यकारों या चिंतकों के ब्लोग नहीं हैं। यहाँ हर तरह का माल है।Arun Adityahttp://www.blogger.com/profile/11120845910831679889noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7124647974393569217.post-27118039132633817542008-02-03T09:57:00.000-06:002008-02-03T09:57:00.000-06:00हां अभी एग्रीगेटर पर शीर्षक देख मैं आपकी इस टिप्प...हां अभी एग्रीगेटर पर शीर्षक देख मैं आपकी इस टिप्प्णी को पढने जा रहा था चलिए आपने वाजिब सवाल उठाया है हिन्दी में बुढभस बढ रही है,सवाल है कि दिल्ली में अधिकांश लेखक अपनी गोटी लाल करने के सिवा और क्या कर रहे हैं। ये गंभीर लोग खुद एक गभ्ीर ब्लाग नहीं खडा कर सकते तो यही मीन मेख निकालेंगे,सबसे बडा सवाल है ब्लाग के अर्थ का ।वह चिटठा है तो इसे जो लोग केवल खुदतक सीमित रख्ाने से आगे सबसे जोड रहे हैं वे हिन्दी के प्रतिबदध लोग हैं।उदय प्रकाश ,विष्णुनागर आदि ने ब्लाग की शुरूआत कर अच्छी पहल की नये लेखकोंे काे आगे बढाने के लिहाज से। दरअसल यह नयी दुनिया है इसे देखने के लिए लेंस का नंबर कुछ बढाना होगा।karvaanhindiacom.blogspot.comnoreply@blogger.com