24 April, 2009

है कितने अनजाने लोग

- प्रेमकुमार मणि

वरूण गांधी के भाषण पर किशनगंज में लालू प्रसाद की टिप्‍पणी व उस पर हंगामा पिछले दो दिनों से पढ-सुन रहा हूं। पता हुआ है कि इसके लिए लालू प्रसाद पर मुकदमा दर्ज हुआ है और किसी अफसर ने गिरफतारी के आदेश भी दिये हैं। बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार सहित पूरी भाजपा और देश का सवर्ण मीडिया एक बार फिर अपने तेवर में दिख रहे हैं। सबके साथ मैंने भी इस टिप्‍पणी पर विचार किया है और अपने तईं मुझे लगा कि इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके लिए हंगामा बरपा दिया जाए। मैंने कई बार लालू प्रसाद की टिप्‍पणी पर ध्‍यान दिया। उन्‍होंने कहा है कि 'मैं अगर ग़हमंत्री होता तो वरूण की छाती पर रोलर चलवा देता'। नीतीश कुमार हमारे मित्र हैं और मैं उन्‍हें गंभीर आदमी समझता हूं। मेरी गलतफहमी थी कि वे भाषा की बारीकियों को जानते हैं। वे भाजपा के साथ होते हुए भी उससे कुछ अलग हैं और उनका दिल-दिमाग ग्रामीण उर्जा से खचित है। उनकी बोली और शैली में मगही माटी के बेल-बूटे होते हैं, जो उनके भाषण को खूबसूरत बनाते हैं। सवर्ण मीडिया और भाजपा यदि लालू प्रसाद के मिजाज को नहीं समझ पाती तो कोई बात नहीं। वे दोनों साफ तौर पर अलग-अलग हैं। लेकिन नीतीश कुमार भी इस मानसिकता में शामिल हो गये, यह हैरान करने वाली बात है। भाषा के साथ मुहावरे होते हैं। मुहावरों के अपने अर्थ होते हैं, अपने तेवर होते हैं। छाती पर मूंग दलने के मुहावरे से जो अपरिचित हैं, वे छाती पर रोलर चलवाने के मुहावरे को भी नहीं समझ पाएंगे। जब जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री थे तब एक बार उन्‍होंने गुस्‍से में कहा था कि 'भ्रष्‍ट अधिकारियों को टेलीफोन के खंभों से हैंग करवा दूंगा'। यह भाषण किसी बातचीत या जनसभा में नहीं, उन्‍होंने संसद में दिया था। लेकिन तब उनपर न कोई मुकदमा हुआ, न उनकी गिरफतारी के आदेश दिये गये । न किसी काबिल चीप मिनिस्‍टर ने उस पर प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की थी। नेहरू को इसके लिए व्‍यापक समर्थन मिला था। वरूण गांधी की टिप्‍पणी पर यदि लालू प्रसाद कहते हैं कि मैं ग़हमंत्री होता तो छाती पर रोलर चलवा देता, तो यह भाषण में मुहावरे का प्रयोग है। भाषा में नित नये प्रयोग होते रहते हैं, नये मुहावरे गढे जाते हैं, नये प्रतीक गढे जाते हैं। कभी छाती पर मूंग दली जाती थी, अब छाती पर रोलर भी चलेंगे। जो लोग छाती चौडी होने के मुहावरे को जानेंगे, जो छाती पर सांप लोटने के मुहावरे को जानेंगे, वे छाती पर रोलर चलने के मुहावरे को भी समझेंगे। अब कोई जानबूझ कर न समझना चाहे और अर्न्‍तमन में वरूण के बयान के लिए प्‍यार पाले तो बात कुछ और है। फिराक ने लिखा है-'जान के सब कुछ कुछ भी न जाने, हैं कितने अनजाने लोग'।