संशयात्मा

13 October, 2008

बयानों की बाढ़

18 अगस्त को नेपाल में कुशहा के पास तटबंध टूटते ही बिहार के सैकड़ों सीमावर्ती गांव तबाह हो गये हजारों लोग मारे गये. लगभग एक पखबाड़े तक पानी रोज नए-नए इलाकों को डूबोता गंगा की ओर बढ़ता रहा. 19 से 30 अगस्त के बीच जानमाल का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ.
आइए जानें, तबाही के इन दिनों में व उसके बाद बिहार के प्रमुख राजनीतिक दल क्या कह रहे थे.

19 अगस्त
नेपाल पर आरोप
विजेंद्र यादव, जल संसाधन मंत्री
बिहार के जल संसाधन मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि नेपाल के अधिकारियों के असहयोगात्मक रवैये के कारण तटबंध टूटा है. यह अंतराष्‍ट्रीय मसला है. भारत सरकार को ही नेपाल से बात करनी चाहिए. फिर भी बिहार सरकार तटबंध कटाव स्थल को पाटने की हर संभव कदम उठा रही है. (दैनिक हिंदुस्तान)

20 अगस्त
नौकरियों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी
ललन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जदयू
ललन सिंह ने लालू प्रसाद द्वारा नौकरी देने के मामले में नया पिटारा खोलने का ऐलान किया और कहा कि कैसे डीए मामले में पक्ष में गवाही देने वालों को भी नौकरी देकर उपकृत किया गया इसका प्रमाण मीडिया के समक्ष पेश करेंगे. उन्होंने कहा कि जदयू जमीन लिखवाकर रेलवे में नौकरी देने की बात पर अब तक अपनी जगह कायम है.(दैनिक हिंदुस्तान)

श्‍याम रजक व शकील अहमद खां, प्रवक्ता राजद
राजद के राष्‍ट्रीय प्रवक्ता द्ययाम रजक व प्रदेष मुख्य प्रवक्ता शकील अहमद खां ने राजद की ओर से नीतीश कुमार के रेलमंत्रीत्व काल में रेलवे में हुई 231 नियुक्तियों की सूची जारी करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में अपने संसदीय क्षेत्र के एक खास वर्ग के लोगों को और जद यू के प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह के चहेतों को रेलवे में नौकरी दी. (दैनिक हिंदुस्तान)

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री बिहार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कार्यकर्ताओं को संकल्प दिलाया कि लोकसभा चुनाव में राजद को जीरो पर आउट कर दिया जाएगा. वह मुख्यमंत्री आवास एक अणे मार्ग में सहरसा, मधेपुरा और दरभंगा जिला के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे.

21 अगस्त
देर आये, तब भी दुरुस्त नहीं
राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष
प्रतिपक्ष की नेता राबड़ी देवी ने कहा कि नेपाल स्थित कुसहा के पास कोसी तटबंध टूटने के बाद भीमनगर बराज के सभी फाटक खोल दिये गये जिससे हजरों लोग बह गये. बराज का फाटक खोलने से पहले लोगों को सूचना तक नहीं दी गयी. अगर सरकार सजग रहती तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था और हजारों लोग मौत के मुंह में जाने से बच सकते थे.उन्होंने बाढ़ से प्रभावित जिलों को सेना के हवाले करने और सेना से राहत कार्य चलाने मांग की. (दैनिक हिंदुस्तान)

( तथ्य यह है कि भीमनगर बराज से काफी पहले नेपाल में स्थित कुसहा के पास तटबंध टूटा है. जहां से तटबंध टूटा है वहां कोसी की नयी धार बन गयी है. इसी से होकर कोसी का लगभग 80 फीसदी पानी बह रहा है. कोसी अंचल के हजारों लोगों की मौत बराज से पानी छोड़ने से नहीं बल्कि तटबंध टूटने से हुई थी. राबड़ी देवी के इस बयान को आधार बना कर जलसंसाधन मंत्री विजेंद्र यादव ने अगले दिन कहा कि राबड़ी देवी को बिहार के भूगोल का ज्ञान नही है. आगे चलकर राजद की ओर से पूर्व जल संसाधन मंत्री जगदानंद ने मोर्चा संभाला तो उन्होंने भी शुरूआत एक उलझे हुए बयान (प्रभात खबर, 23 अगस्त) से की, जिस कारण उनके सवालों का कोई उत्तर न होने के बावजूद सत्ता पक्ष उन्हें पहले बयान के आधार पर आड़े हाथों लेता रहा.।)

22 अगस्त
जयप्रकाश -विजेंद्र आमने सामने
राजद के वरिष्‍ठ नेता व केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद हा कि नेपाल स्थित कोसी तटबंध टूटने से प्रलय की स्थिति है. उन्होंने कहा कि केंद्र के अनवरत निर्देश के बावजूद कार्यों की कोई जानकारी नहीं दी गयी. कोसी तटबंध की मरम्मत के लिए राशि केंद्र सरकार देती है.राशि खत्म भी नहीं हुई, काम भी नहीं हुआ और कहा गया कि कार्य पूरा हो गया है.
श्री यादव के आरोपों का जबाव देते हुए बिहार के जल संसाधन मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि केंद्रीय जल संसाधन मंत्री को अंतररष्‍ट्रीय कानून का ज्ञान नहीं है. नेपाल क्षेत्र में कोसी का तटबंध टूटा नहीं बल्कि कटाव हुआ है. केंद्रीय मंत्री को किस हैसियत से नेपाल क्षेत्र में तटबंध कटाव की सूचना दी जाती. क्या इनका वहां के दूतावास पर नियंत्रण है?(दैनिक जागरण)

22, 23, 24 व 25 अगस्त
नौकरी मामले में एक-दसरे को बदनाम करने की होड़
श्‍याम रजक व शकील अहमद खां, अखिलेश्‍ा सिंह (राजद)
ललन व शिवानंद तिवारी (जदयू)

22 अगस्त : जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह व राष्‍ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने संवाददाता सम्मेलन में ऐसे चार लोगों की विवरणी पेश की जिन्हें डीए मामले में रेलवे में नौकरी मिली. उन्होंने कहा कि पार्टी इन सब मामलों को लेकर 23 अगस्त को प्रधानमंत्री से मुलाकात करेगी और उनके समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करेगी.

22 अगस्त : राजद के राष्‍ट्रीय प्रवक्ता श्‍याम रजक ने कहा है कि जदयू के नेता डिरेल्ड हो गये हैं इसलिए रेल मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप लगा रहे हैं. श्री प्रसाद अदालत में गवाही के बाद रेल मंत्री बने थे लिहाजा यह कहना पूरी तरह गलत है कि किसी को गवाही के बदले रेलवे में नौकरी की पेशकश की गयी.

23 अगस्त : राजद नेता व केंद्रीय मंत्री डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह, राष्‍ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता श्‍याम रजक, राज्य प्रवक्ता शकील अहमद खां एवं महासचिव निहोरा प्रसाद यादव ने आरोपों का दूसरा ऐपिसोड जारी करते हुए नीतीष कुमार पर रेलवे के ग्रुप-सी के पद पर नियुक्ति में हेरा-फेरी का आरोप लगाते हुए नौकरी पाये नालंदा एवं बेगुसराय संसदीय क्षेत्र के 100 से ज्यादा लोगों का नाम पेश किया. उन्होंने कहा राजद का प्रतिनिधिमंडल जल्दी ही प्रधानमंत्री से मिलकर मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग करेगा.

23 अगस्त : जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह ने राजद द्वारा प्रधानमंत्री से जांच की मांग को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि लालू प्रसाद जानते हैं कि जांच में कुछ नहीं मिलने वाला इसलिए वे खुद जांच से कतरा रहे हैं, सिर्फ बयान देकर काम चला रहे हैं.

24 अगस्त : जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा है कि रेलवे भर्ती मामले में राजद ने बेगुसराय, नालंदा और बाढ़ के लोगों की मेधा पर सवाल उठाया है. परोक्ष रूप से दो खास समुदायों के लोगों की मेहनत, श्रम और अध्ययन साधना पर सवाल खड़ा किया गया है. उन्होंने राजद के इस कृत्य की भर्त्सना की. (दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिंदुस्तान)

24 अगस्त (प्रधानमंत्री से राजग नेताओं की मुलाकात) : राजग का एक प्रतिनिधिमंडल ने द्यानिवार (23 अगस्त) को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भेंट कर जमीन के बदले नौकरी के कथित घोटाले के मामले में रेलमंत्री लालू प्रसाद को तुरंत बर्खास्त कर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की. जदयू के अध्यक्ष शरद यादव, भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी की अगुवाई में प्रधानमंत्री से मिला और उसने श्री यादव व उनके परिवार वालों के खिलाफ जमीन के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े दस्तावेज और ज्ञापन दिया. 25 मिनट की इस मुलाकात के बाद श्री नकवी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री इन दस्तावेजों के बावजूद रेल मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते हैं तो यही माना जाएगा कि उनकी मूक सहमति है. (दैनिक हिंदुस्तान)

24 अगस्त : रेल मंत्री लालू प्रसाद ने एनडीए के जमीन के बदले नौकरी देने के आरोपों को नीचता की हद बताते हुए विद्वेष व प्रतिशोध की भावना किया हुआ काम करार दिया. श्री प्रसाद ने कहा कि यह एनडीए की विदाई का समय है. (दैनिक हिन्‍दुस्‍तान)

25 अगस्त
यह प्रलय है, पीड़ितों के परिजन आगे आएं !
नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री बिहार सरकार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार (24 अगस्त) को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण के बाद खुद स्वीकार किया कि बाढ़ नहीं प्रलय की चेतावनी है. मुख्यमंत्री ने लोगों से सचेत रहने को कहा. उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री से भी बाढ़ की विभीषिका व तबाही पर चर्चा करेंगे. पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर स्तर पर गंभीर है और स्थिति सामान्य होने तक राहत कार्य चलता रहेगा. उन्होंने गैर सरकारी संगठनों से भी मदद मांगी. इसके अलावा लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए पीड़ित परिवार के परिजनों को आगे आने की अपील की. (दैनिक हिंदुस्तान, पृष्‍ठ सं.-1 व 2)

26 अगस्त
नेपाल में भी करेंगे राहत कार्य
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि वे नेपाल में भी राहत कार्य चलाने को तैयार हैं. सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कें अगर यह जिम्मेवारी उन्हें देगा तो वे बखूबी उसपर अमल करेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत और बचाव कार्यों को सीमा या राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। इस समय हम सभी को मिलकर राहत कार्य चलाना है, लोगों की मदद करनी है. कोसी नदी द्वारा फैलाई गई तबाही का दंश बिहार के साथ-साथ नेपाल में भी लोग भुगत रहे हैं. लिहाजा बिहार हर तरह की जिम्मेवारी उठाने को तैयार है. (दैनिक हिंदुस्तान)

पूर्व जल संसाधन मंत्री के सवालों पर भिड़ंत

धारा बदलने से आयी बाढ़ : जगदानन्द
राजद के वरिष्‍ठ नेता व पूर्व जल संसाधन मंत्री जगदानन्द ने कोसी तटबंध के टूटने से आई बाढ़ पर राजनीति न करने की सलाह पक्ष और विपक्ष को दी है. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में कोई राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ तो इससे नेपाल को राजनीतिक ताकत मिल जाएगी. पूर्व मंत्री ने कहा कि कुसहा में बांध टूटा नहीं है बल्कि यह बाढ़ कोसी की धारा बदलने का परिणाम है. (23 अगस्त, 08, प्रभात खबर)

निजी दुश्‍मनी से आयी बाढ़
पूर्व जल संसाधन मंत्री जगदानन्द ने बांध टूटने का कारण गिनाते हुए कहा कि मुख्मंत्री ने निजी दुश्‍मनी दिखाते हुए मधेपुरा, सुपौल, सहरसा, अररिया एवं पूर्णिया जिले को इस हाल में पहुंचा दिया है. उन्होंने विदेष मंत्री प्रणव मुखर्जी का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम 21 अगस्त को लिखा पत्र भी सार्वजनिक किया. श्री सिंह ने सिंचाई विभाग की बाढ़ बुलेटिन जारी करते हुए कहा कि 17 अगस्त तक विभाग बताता रहा कि सभी तटबंध सुरक्षित हैं. 18 को दोपहर में तटबंध टूटने के बाद कहा गया कि तटबंध के 12.10 एवं 12.90 किमी. के स्परों पर कई दिनों से नदी का कटाव हो रहा था. फलस्वरूप 400 मी. की लंबाई में तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया है जिससे नेपाली भूभाग एवं वीरपुर में बाढ़ का पानी प्रवेष कर रहा है. उन्होंने नीतीष कुमार से सवाल किया कि सिंचाई विभाग का लाइजनिंग ऑफिसर का स्थाई कार्यालय काठमांडू में है, उसने बांध मरम्मत को लेकर नेपाल स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क क्यों नहीं किया? (30 अगस्त, दैनिक हिंदुस्तान)

नदारद थे अभियंता
पूर्व जल संसाधन मंत्री जगदानन्द ने कहा कि बांध तोड़ने के लिए सिर्फ और सिर्फ नीतीश कुमार जिम्मेवार हैं और उनमें गैरत है तो शीघ्र गददी छोड़ें. अपनी ताकत का अहसास कराने और नरमेघ करने के लिए नीतीश कुमार ने बांध तोड़ा है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा यह कहकर लोगों को बरगलाया जा रहा है कि कोसी उच्चस्तरीय कमेटि केन् की कमेटि है. दरअसल बिहार सरकार द्वारा गठित इस कमेटि में राज्य और केन् के विषेच्चज्ञों की अध्यक्षता केन्‍द्रीय बाढ़ नियंत्रण आयोग का अध्यक्ष करता है. उन्होंने अक्टूबर 2007 में आयोजित इस कमेटि की बैठक की कॉपी पेश करते हुए कहा कि इस बैठक में सूबे के जलसंसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख समेत एक को छोड़कर सभी मुख्य अभियंता नदारद थे. इससे अहसास लग सकता है कि कोसी बांध की सुरक्षा को लेकर नीतीश कुमार कितने गंभीर थे. (31 अगस्त, 08, दैनिक हिंदुस्तान)

केंद्र ने नहीं की कार्रवाई : विजेंद्र यादव
जलसंसाधन मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा है कि तटबंध मरम्मत से बचाव कार्यों तक में केंद्र के असहयोग के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई. जहां तटबंध की मरम्मत के लिए केंद्रीय कमिटी ने मामूली रकम स्वीकृत की, वहीं कटाव शुरू होने के बाद केंद्रीय एजेंसियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. कोसी का तटबंध अंतरराष्‍ट्रीय मसला होने के कारण केंद्र के अधीन है तटबंध का कटाव निरोधक कार्य कोसी उच्चस्तरीय कमेटि द्वारा अनुशं‍सित होता है. इसके अध्यक्ष केंद्र सरकार के अधिकारी होते हैं. राज्य उन अनुसंशाओं के अनुरूप काम करवाने को बाध्य हैं. जहां तटबंध कटा है वहां कमेटि ने महज 1.25 लाख रुपये के कार्यों की ही अनुसंशा की. यह कार्य 15 जून के पूर्व करा लिया गया और इसे 18 जूलाई की बैठक में केंद्रीय मंत्री जयप्रकाष नारायण यादव ने भी स्वीकारा कि निर्धारित काम पूरा हुआ है. अगर केंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय को राज्य सरकार द्वारा कटाव निरोध कार्य से संतुष्टि नहीं थी तो उसने अपने स्तर से ही नेपाल के हिस्से के कार्यों का कार्यान्वयन क्यों नहीं करवाया? (31 अगस्त, 08, दैनिक हिंदुस्तान)

राजद को कैसे मिला पत्र?
जदयू के प्रदेष अध्यक्ष ललन सिंह एवं सिंचाई मंत्री विजेन् प्रसाद यादव ने कहा है कि कोसी तटबंध टूटने की निच्च्पक्ष जांच कराने पर कें ही कटघरे में खड़ा होगा. श्री सिंह ने पूछा कि विदेष मंत्री प्रणव मुखर्जी का पत्र राजद के पास कैसे पहुंच गया? उन्होंने कहा कि जगदानन्द अज्ञानी की तरह बात कर रहे हैं. उनके द्याासनकाल में 2004 में बिहार के सारे तटबंध टूट गए थे. वे कैसे टूटे? दूसरी ओर जदयू के प्रवघ षिवानंद तिवारी ने कहा है कि लालू प्रसाद जब भी राहत कार्य में जुटते हैं, घोटाला हो जाता है. उन्होंने कहा कि रेलवे के 90 करोड़ रुपये लेकर जो राहत कार्य वे करना चाहते हैं उसे मुख्यमंत्री राहत कोच्च में जमा करवा दें. उन्होंने पूर्व सिंचाई मंत्री जगदानन्द पर बरसते हुए कहा कि वे सच को झूठ और झूठ को सच बनाने के महारथी हैं. अपने पहले बयान में कहा कि तटबंध की टूट मानवीय भूल नहीं है बल्कि परिस्थितियों की देन है. इससे लड़ने के लिए सामूहिक प्रयास होने चाहिए न कि राजनीति. अचानक अब पलटी मार कर कह रहे हैं कि बांध नीतीष कुमार ने तोड़ा है. (1 सितंबर, 08, दैनिक हिंदुस्तान)

भाई की पीड़ा से हुई बेचैनी : शिवानंद
जदयू के राष्‍ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने रेल मंत्री लालू प्रसाद की बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सक्रियता पर सवाल करते हुए कहा कि पिछले साल आयी बाढ़ के दौरान वे कहां थे? लोग कह रहे हैं कि ' भाई का दर्द भाई ही समझता है'. भाई की पीड़ा ने उन्हें इतना संवेदनशील बना दिया है कि वे उनके बीच कूद पड़े हैं. (2 सितंबर, 08, दैनिक जागरण)

नीतीश के अहंकार ने डूबोया : लालू
रेल मंत्री लालू प्रसाद ने कहा कि नीतीश कुमार ने अपने अहंकार में पूरे बिहार को डूबो दिया. उन्होंने कहा कि कोसी के प्रलय के लिए नीतीश सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं. यह ि‍‍क्रमनल ऐक्ट है. सी.एम. होके छोटी बात करते हैं. कहते हैं-'चुनाव के चलते राहत बंटवाया जा रहा है.' ' भाई का दर्द भाई ने जाना.' पटना में बैठ के कंप्यूटर से राहत संभव नहीं. सरकार में बैठे लोगों का दिमाग खराब हो गया है. कह रहे हैं ' राहत रेल' को पटना नहीं आने देंगे. बाल ठाकरे की तरह बयान दे रहे हैं कि पटना में ि‍शि‍वर नहीं है. (3 सितंबर, 08, दैनिक हिंदुस्तान)

बहस नहीं करना है : नीतीश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उनको किसी के साथ बहस में शामिल नहीं होना है. उनको तो बस बाढ़ पीड़ितों के लिए काम करना है. रेलमंत्री लालू प्रसाद द्वारा उठाये जा रहे सवालों के बाबत उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को आदत है 48 घंटे घूमकर 48 बार मीडिया से बात करने की. 3 साल पहले जनता ने उनको ऐसा उखाड़ कर फेंका है कि वह इसे पचा नहीं पा रहे हैं. बाढ़ पीड़ितों द्वारा घर छोड़कर भागने की तुलना देश के बंटवारे से किये जाने से नाराज श्री कुमार ने कहा कि इससे बड़ी नासमझी क्या हो सकती है? पूर्णिया के चूनापूर हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ने लालू प्रसाद के दौरे को ड्रामेबाजी की संज्ञा दी. (3 सितंबर, 08, दैनिक हिंदुस्तान)

इन्ही की करनी से टूटा तटबंध : मोदी
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजद और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हीं दलों की करनी से कोसी का तटबंध टूटा है. उन्होंने तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि आज भी कोसी तटबंध की वही स्थिति है जो 1991 में थी लेकिन राजद और कांग्रेस की हुकूमत ने इस पर ध्यान नहीं दिया. श्री मोदी ने तत्कालीन सिंचाई मंत्री जगदानंद सिंह को ईमानदार और सक्षम तो माना लेकिन यह भी कहा कि वे जबान के अच्छे नहीं हैं.
(6 सितंबर, 08, दैनिक हिंदुस्तान)

काठमांडू कार्यालय को नहीं मिला पैसा : जगदानन्द
पूर्व जल संसाधन मंत्री राजद नेता जगदानन्द ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बरसते हुए कहा कि जनता के बीच भ्रम उत्पन्न करने के लिए कुसहा के समीप कोसी तटबंध के 12.90 किमी. टुटान की चर्चा नहीं कर इधर-उधर की पुरानी कहानी सुनायी जा रही है. सरकार जिस काठमांडू स्थित जल संसाधन विभाग के लिए संपर्क अधिकारी के माध्यम से सूचना देने की बात करती है वह कार्यालय ही आवंटन के अभाव में बंद है. उन्होंने कहा कि तटबंध को लेकर सरकार का तर्क है कि नेपाल क्षेत्र में कार्य नहीं करने दिया गया जबकि वह खुद मानती है कि जून में सभी कार्य पूरे कर लिए गए. आखिर ऐसी कौन स्थिति उत्पन्न हो गयी कि मात्र 5 अगस्त से ही रहे कटाव रोकने के कार्य में ही व्यवधान उत्पन्न हो गया. एकमात्र जल संसाधन विभाग ही ऐसा विभाग है जिसने अंतराष्‍ट्रीय मामलों के लिए काठमांडू में कार्यालय खोल रखा है. इसको वर्तमान सरकार ने बंद करवा दिया है. कार्यालय व्यय व कर्मियों के वेतन भुगतान आदि के लिए सरकार ने आवंटन बंद कर दिया है. इसको प्राप्त करने को संपर्क पदाधिकारी अरुण कुमार 14 व 15 को सिंचाई भवन मुख्यालय पहुंचे थे. इनको अब छुट्टी पर दिखाया जा रहा है. सरकार बताये कि ऐसी ि‍वषम परिस्थिति में किस आधार पर छुट्टी मंजूर की गयी. संपर्क कार्यालय का फैक्स व फोन भी भुगतान नहीं होने के कारण बंद है. उन्होंने कहा कि सरकार बताये कि किस परिस्थिति में संपर्क पदाधिकारी मुख्यालय में मौजूद थे. उन्होंने कहा कि वीरपुर के तत्कालीन मुख्य अभियंता सत्यनारायण ने तो मुख्यालय सहित सात स्थानों पर स्थिति की सूचना दी किंतु उस पर ध्यान नहीं दिया गया. उनका पत्र ही असलियत को सामने रख रहा है. जनता को मालूम हो गया कि सरकार सोयी रही व मामले को अभियंताओं पर छोड़ दिया. उन्होंने कहा कि विभाग के वीरपुर स्थिति हवाई अड्डे का भी कटाव रोकने को कभी उपयोग नहीं किया गया. (8 सितंबर, 08, दैनिक जागरण)

(कुछ छूट गए प्रसंग : तबाही के इन दिनों में ही राज्य सरकार ने राकंपा के प्रदेष अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का मकान खाली करवाया. राजनीतिक बवाल खड़ा होने पर कई दिनों तक राज्य सरकार के मंत्री समेत जदयू के अनेक वरीय नेता इस पर प्रेस कांफ्रेंस करते रहे. लोजपा के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने बाढ़ के मुददे पर राजनीतिक बयानबाजी से लगभग परहेज रखा. माले बाढ़ के शुरूआती दिनों में राज्य व केंद्र सरकार की 'साम्राज्यवादपरस्ती' के खिलाफ जेल भरती रही. माकपा और भाकपा ने बयानबाजी को लेकर खास उत्साह नहीं दिखाया.)

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प्रमोद रंजन
Patna, Bihar, India
प्रमोद रंजन - 22 फरवरी, 1980 को बिहार में जन्‍म। हिमाचल तथा पंजाब में रहकर अमर उजाला, दैनिक भास्‍कर, पंजाब केसरी व दिव्‍य हिमाचल के लिए पत्रकारिता। ग्राम परिवेश व भारतेंदु शिखर नामक पत्रों के साहित्‍य परिशिष्‍ठों का संपादन। पटना से प्रकाशित मासिक वैचारिक मासिक 'जन विकल्‍प' का संपादन. इन दिनों पटना में रहकर आलोचनात्‍मक लेखन. email : pramodrnjn@gmail.com मोबाइल : 9234382621
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