-प्रभात कुमार शांडिल्य
कोसी को फिर से भीमनगर बराज में कैद कर रखना, टूटे एफ्लक्स बांध की मरम्मत करना तथा इसके द्वारा एक पखवारे में किये गये विध्वंस की भरपाई अगले ५० वर्च्चों में संभव नहीं लगती. बाढ़ का पानी उतरने पर स्पष्ट हो जाएगा कि आजादी के ६० वर्षों में जो भी निर्माण कार्य हुआ था, उसे अब पुनर्जीवित करना कितना दुष्कर कार्य है.
इस त्रासदी को किसी ने प्रलय, किसी ने सामूहिक नरसंहार, किसी ने जबरिया जलसमाधि की संज्ञा दी है. किसी ने षडयंत्र का परिणाम, किसी ने अधिकारियों का निकम्मेपन, किसी ने नेता-अधिकारी-अभियंता-ठेकेदार गठजोड़ के प्रभावी हो जाने का परिणाम बताया है. इधर जो तथ्य सामने में आए हैं. उनसे यह स्पष्ट हो रहा है कि सरकारी तंत्र के निकम्मेपन के कारण कोसी ने बिहारवासियों पर यह कहर ढाया है.
बिहार सरकार के मुख्य अभियंता सत्यनारायण भीमनगर बैराज के नजदीक वीरपुर स्थित कोसी बहुउददेश्यीय परियोजना मुख्यालय में पदस्थापित थे. उन्होंने ९ अगस्त,२००८ को ही यह सूचना भेजी थी कि नेपाल में कुसहा के पास एफ्लक्स बांध में तेजी से कटाव हो रहा है और त्वरित कार्रवाई नहीं की गयी तो बांध पर टूट का खतरा है, जिसके भयावह परिणाम होंगे. उन्होंने यह त्राहिमाम पत्र, फैक्स एवं बेतार संवाद के तौर पर काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास में पदास्थापित कोसी परियोजना के बिहार सरकार के लायजन अधिकारी अरुण सिंह को संदेश भेजा. इसी तरह का संदेश बिहार के जल संसाधन विभाग के सचिव सहित कुल ११ अधिकारियों को भेजा, किंतु सब चुपचाप बैठे रहे और बिहार सरकार का जल संसाधन विभाग १७ अगस्त तक प्रतिदिन प्रेस विज्ञप्ति जारी करता रहा कि राज्य भर के सभी बांध, बैराज और तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं.
इंजीनियर सत्यनारायण ने त्राहिमाम संदेश में यह कहा था कि कुसहा के बनटप्पू इलाके में जो नेपाल के सुनसरी जिला का भाग है, नदी एफ्लक्स बांध को भयानक रूप से काट रही है और नेपाल के कस्टम विभाग के अधिकारी भारत की ओर से जा रही निर्माण सामग्री से भरे वाहनों को बेवजह काफी देर तक रोक रहे हैं, जिससे मरम्मत संभव नहीं हो पा रही है. साथ ही यह भी शिकायत की थी कि स्थानीय मजदूरों को कटाव में मरम्मत में लगने से रोका और भगाया जा रहा है. इसलिए इसमें भारत और नेपाल सरकार के उच्चाधिकारियों का तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है, ताकि एफ्लक्स को टूटने से बचाया जा सके. काठमांडू स्थित लायजन अफसर अरुण कुमार सिंह से अपेक्षित था कि वे काठमांडू में भारतीय राजदूत तथा नेपाल के विदेश मंत्री मंत्रालय को इन तथ्यों से अवगत कराते, किंतु राज्य सरकार बता रही है कि अरुण कुमार सिंह १८ अगस्त तक छुट्टी पर थे और इन त्राहिमाम संदेषों की सुधी लेने वाला कोई नहीं था. सत्यनारायण ने १४ और १५ अगस्त को भी त्राहिमाम संदेश दोहराया, तिहराया था. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
इसी कड़ी में काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के आधिकारिक प्रवक्ता गोपाल वागले ने कहा है कि भारतीय दूतावास को बाढ़ की आशंका की जानकारी १७ अगस्त को फैक्स से मिली. वागले और अरुण सिंह, दोनों सत्यनारायण से संदेश मिलने की बात से इंकार करते हैं. इधर सूचना मिली है कि इंजीनियर सत्यनारायण को बतौर सजा डिमोट कर दिया गया है. यह भी जानकारी मिली है कि कोसी परियोजना के एक सहायक अभियंता वीरपुर स्थित अपने कार्यालय में बैठ कर कनीय अभियंता और लेखपाल के साथ मापी पुस्तिका एवं अन्य अभिलेखों में हेराफेरी करने में १७ अगस्त को मशगूल थे तथा एक प्राइवेट जीप पर कार्यालय से आवास और बाजार की सैर कर रहे थे. सभी अभियंता कोसी परियोजना कॉलोनी, वीरपुर में आराम करते रहे. किसी ने वास्तविक कार्यस्थल पर जाने की जहमत नहीं उठायी. स्थानीय नेपाली मजदूर बतलाते हैं कि भारतीय ठेकेदार सरकार से ८९ भारतीय रुपये पाते हैं, मजदूरी के मद में और नेपाली मजदूरों से २० रुपये में मजदूरी करवाना चाहते हैं. इसलिए नेपाली मजदूर काम करने को तैयार नहीं हैं. ठेकेदारों और अभियंताओं को मारपीट कर भगाने की बात से वे इंकार करते हैं और कहते हैं कि उनलोगों ने नहीं, उनलोगों के साथ भारतीय अभियंताओं और ठेकेदारों ने बुरा बरताव किया है. लोग मानते हैं कि यह सब नेता-इंजीनियर-ठेकेदार व अफसर गिरोह की करतूत है. इस आशय की खबरें नेपाली के एक प्रमुख दैनिक कांतिपुर टाइम्स में छपी हैं.
राज्य सभा के सदस्य व साहित्य अकादमी से पुरस्कृत लेखक जाबिर हुसेन इस पूरे प्रकरण पर कहते हैं कि कोसी की तबाही से जुड़े जो तथ्य प्रकाश में आये हैं, उनसे लगता है कि राज्य के प्रशासन तंत्र में इस विकराल स्थिति से निपटने का सामर्थ्य नहीं बचा है. ऐसी स्थिति में केंद्रीय सरकार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार अधिनियम के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए बचाव एवं राहत की और अधिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए. साथ ही उन्हें अपनी टीम को अगले कुछ महीने तक प्रभावित इलाकों में ठहर कर काम करने का निर्देश देना चाहिए।
2 comments:
loot abhi baaki hai.
क्या कहा जाय। अदालत का वह रूख सही लगता है कि इस देश को भगवान भी नहीं बचा सकते।
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