14 October, 2008

बाढ 2008

अनकही कहानी
( 'बाढ 2008- अनकही कहानी' शीर्षक से यह 32 पन्‍नों की पुस्तिका 15 सितंबर को जारी हुई है। 10 अक्‍टूबर तक इसके पांच संस्‍करण हो चुके हैं। एक महीने में ही इसका मुद्रित संस्‍करण कई लाख लोग इसे पढ चुके हैं।
अभी तक आपने इसके कुछ लेख इस ब्‍लॉग पर पढे हैं। अब यह पूरी पुस्तिका यहां उपलब्‍ध है। यहां इसके सभी लेखों के लिंक दिये जा रहे हैं ताकि इसे क्रमवार पढने में पढने में सुविधा हो)
लेखों के लिंक
  1. बाढ की जाति - प्रमोद रंजन
  2. बाढ है, मजाक नही- सत्‍यकाम
  3. सरकारी मिशनरी में उत्‍साह नहीं- मेधा पाटकर से बातचीत
  4. बयानों की बाढ- 19 अगस्‍त से 8 सितंबर,08 के बीच राजनीतिक दलों के बयान

7. सुधरो नीतीश कुमार- सत्‍यकाम

11 सितंबर को अमेरिका में हवाई हमले में लगभग ५ हजार लोग मारे गये थे. आज भी उनकी याद में मोमबत्तियां जलाई जाती हैं. भारतीय मीडिया भी इन तस्वीरों को प्रसारित करता है. क्या १८ अगस्त की याद में, जिसमें ५० हजार लोग मारे गये, भी मोमबत्तियां जलाई जाएंगी? क्या यह देश इसे एक काले दिन की तरह याद करेगा? उत्तर है-नहीं. कारण; हम-आप सब जानते हैं.

1 comments:

उदय प्रकाश said...

ये तथ्य भयावह है। सम्भवत: १८६९-७२ और १९४२ के दुर्भिक्ष और महामारी के दौरान औपनिवेशिक अन्ग्रेज़ शासको ने भी भारतीय जनता के प्रति ऐसी सम्वेदनहीनता और क्रूरता नही दिखाई थी। जिस तरह का राजनीतिक-प्रशासनिक ढान्चा देश मे चल रहा है, उसमे ऐसी अमानुषिक विक्रितियोन का पैदा होना स्वाभाविक है। यह एक आन्ख खोलने वाली रपट है।

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